यहाँ तिवारी के बेनाम क्रेशर में सारे कायदे छोड़ रहे धुआँ के गुब्बारे

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यहाँ तिवारी के बेनाम क्रेशर में सारे कायदे छोड़ रहे धुआँ के गुब्बारे

अनिल लहँगीर पत्रकार

शहडोल

कभी गोहपारू क्षेत्र में क्रेशर के दर्जनों मापदण्डो को धता बताने वाले तिवारी के क्रेशर में विभाग की कार्यवाही भले ही समय-समय पर होती रही हो पर तिवारी ने कभी नियमो का पालन नही किया बल्कि इसके उलट नियमो के बदले अलग-अलग विभागों से मैनेजमेंट का खेल करके अपने गिट्टी-पत्थर के व्यवसाय को जारी रखा है गोहपारू में तमाम नियम कायदों को ताक में रख अब मलैया में क्रेशर की आबोहवा बहाई जा रही है जहाँ दर्जनों नियम के विपरीत क्रेशर का संचालन बेरोकटोक जारी है।

 

न सीमांकन,न रकवा न खदान का निर्धारण…

 

मलैया मुख्यमार्ग में संचालित हो रहे क्रेशर में तिवारी ने न ही खदान के रकवा,सीमांकन का  बोर्ड ही चस्पा किया है और न ही खदान के क्षेत्र का उल्लेख हुआ है यही नही खदान के चारो ओर किसी प्रकार का कोई फेंसिंग या बाउंड्रीवाल भी नही है इस तरह खदान को खाई नुमा छोड़ा गया है जैसे साक्षात मौत का कुआँ।बीते कुछ वर्ष पहले इसी तरह खुली खदानों में कई मवेशी समेत कुछ नाबालिक बच्चों की खदान में गिरकर मौत हो गई थी।किन्तु खनिज व सम्बंधित विभाग तिवारी के इन करतूतों को निहारने में अक्षम नजर आ रहे हैं या फिर नोटों की हरियाली के सामने सब कुछ आल इज वेल है।

धुआँ का गुब्बार जा रहा क्षेत्र में…

इस लापता क्रेशर का नाम तो कहीं उल्लेख नही है हाँ चर्चा है कि गोहपारू का कोई तिवारी किसी सोनी से खरीद लिया है आपको बता दें खदान व क्रेशर संचालित करने के लिए तमाम कागज और नियम कायदे का पालन करना पड़ता है क्रेशर से ही लगे गाँव व नहरों में क्रेशर का धुँध धीरे-धीरे पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रहा है यही नही इस क्रेशर को संचालित करने के लिए पेसा एक्ट के तहत ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी होना चाहिए जो शायद तिवारी जी के पास बामुश्किल से हो।विभाग नजर उठाए तो आभास हो जाएगा कि इस बेनाम क्रेशर में कितने गफलत फरमाए जा रहे हैं।

यहाँ तिवारी के बेनाम क्रेशर में सारे कायदे छोड़ रहे धुआँ के गुब्बारे

कभी गोहपारू क्षेत्र में क्रेशर के दर्जनों मापदण्डो को धता बताने वाले तिवारी के क्रेशर में विभाग की कार्यवाही भले ही समय-समय पर होती रही हो पर तिवारी ने कभी नियमो का पालन नही किया बल्कि इसके उलट नियमो के बदले अलग-अलग विभागों से मैनेजमेंट का खेल करके अपने गिट्टी-पत्थर के व्यवसाय को जारी रखा है गोहपारू में तमाम नियम कायदों को ताक में रख अब मलैया में क्रेशर की आबोहवा बहाई जा रही है जहाँ दर्जनों नियम के विपरीत क्रेशर का संचालन बेरोकटोक जारी है।

न सीमांकन,न रकवा न खदान का निर्धारण…

मलैया मुख्यमार्ग में संचालित हो रहे क्रेशर में तिवारी ने न ही खदान के रकवा,सीमांकन का बोर्ड ही चस्पा किया है और न ही खदान के क्षेत्र का उल्लेख हुआ है यही नही खदान के चारो ओर किसी प्रकार का कोई फेंसिंग या बाउंड्रीवाल भी नही है इस तरह खदान को खाई नुमा छोड़ा गया है जैसे साक्षात मौत का कुआँ।बीते कुछ वर्ष पहले इसी तरह खुली खदानों में कई मवेशी समेत कुछ नाबालिक बच्चों की खदान में गिरकर मौत हो गई थी।किन्तु खनिज व सम्बंधित विभाग तिवारी के इन करतूतों को निहारने में अक्षम नजर आ रहे हैं या फिर नोटों की हरियाली के सामने सब कुछ आल इज वेल है।

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इस लापता क्रेशर का नाम तो कहीं उल्लेख नही है हाँ चर्चा है कि गोहपारू का कोई तिवारी किसी सोनी से खरीद लिया है आपको बता दें खदान व क्रेशर संचालित करने के लिए तमाम कागज और नियम कायदे का पालन करना पड़ता है क्रेशर से ही लगे गाँव व नहरों में क्रेशर का धुँध धीरे-धीरे पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रहा है यही नही इस क्रेशर को संचालित करने के लिए पेसा एक्ट के तहत ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी होना चाहिए जो शायद तिवारी जी के पास बामुश्किल से हो।विभाग नजर उठाए तो आभास हो जाएगा कि इस बेनाम क्रेशर में कितने गफलत फरमाए जा रहे हैं।

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