एक लंबे अरसे से यहाँ जीआरएस काट रहा प्रभार की चाँदी
मनमाने तरीके से चल रहा पंचायत
मनरेगा कार्यों में लीपापोती पुराने कार्यों में पड़ गया मिट्टी
देख रहे हो! “तुलसी”,शशिकांत पंचायत लूट रहा है
शहडोल।।
हमने पंचायत नाम की तीनों वेब सीरीज देखी है कैसे कमियों को बताने के लिए “देख रहे हो विनोद” का डायलाग सोशल मीडिया और आम जनता के बीच एक तकियाकलाम शब्द बना हुआ है पर यहाँ शशिकांत नामक जीआरएस को न तो कोई विनोद कुछ कहने वाला है न यह शशिकांत किसी विनोद के टोकने पर मानने वाला है। ग्राम पंचायत बेमहौरी का यही हाल है जहाँ सचिव के पास वित्तीय प्रभार नही है वहीं रोजगार सहायक इस अवसर का भरपूर लाभ उठा रहा है।
*क्या मुर्दा ले गए मुर्दा घर के शेड*
बेमहौरी ग्राम पंचायत में तालाब पर बने मुक्तिधाम के ऊपर का शेड का रता-पता नही है या यूँ कहें कि इस मुर्दा घर मे जलने वाले शवों के नीचे जमीन तो है पर आसमान में छत नही है।टूटे फूटे इन शेडों के तंग हाल यह बयाँ कर रहे हैं कि यहाँ चौकीदार ही …. यानी मुनासिब ही कातिल है। इसी मुक्तिधाम से लगे मेढ़ के लिए बीते कुछ ही वर्ष पहले ग्रेवल सड़क बनवाया गया था जिसे मिट्टी की परत चढ़ाकर रख दिया गया था जो एक बरसात के आते ही तालाब के किनारों में डूब गई। न मुक्तिधाम का मुक्तिधाम रहा न यहाँ बंनने वाले सड़क का सड़क और बिलों की फर्जी बिसात तैयार कर शासकीय राशि का दोहन हो गया।
*पौधरोपण हो रहा नही झाँकते रोजगार सहायक*
रामसागर तालाब के किनारे पौधरोपण का काम चल रहा है पौधरोपण हो इस बात से कोई गुरेज नही किन्तु हर वर्ष पौधरोपण हो और उन पौधों को सिर्फ बिलों के कैश होने तक जिंदा रखा जाए यह कहाँ तक न्यायसंगत है। कुछ वर्ष पहले भी इस तालाब किनारे वृक्षारोपण हुआ था जिम्मेदारों को इस वृक्षारोपण में एक बात जरूर ध्यान देना चाहिए कि गत वर्ष कितने पौधे लगाए थे और उनमें से कितने जमीन पर दिख रहे हैं या यूं कहें कि उनमें से कितनो की सुरक्षा की गई है।पौधरोपण होते समय रोजगार सहायक मनचाहा मजदूरों की हाजिरी लगाकर मनरेगा के इस काम मे अपनी भी मजदूरी निकाल रहे हैं।
*इनका कहना है..*
(मैं अभी बाहर हूँ आप रोजगार सहायक से बात कर लीजिए,तुलसीदास सिंह सचिव)
(आपको जिससे बताना हो बता दीजिए ,रोजगार सहायक शशिकांत)
