शहडोल जिले की बिगड़ती फिजा का असल जिम्मेदार कौन है यह तो नही कह सकते लचीले कानून व्यवस्था के कारण ऐसे वारदात रोजाना कहीं न कहीं किसी थाना क्षेत्र अन्तर्गत घट रहे हैं जिन पर अंकुश लगा पाना अब जिम्मेदारों के बस में नही रहा।
कल दोपहर अमलाई थाना क्षेत्र अन्तर्गत ईटा भट्टा में घर से एक लापता युवक की लाश मिलने के बाद परिजनों व स्थानीय लोगो का आक्रोश इस कदर भड़का कि लोगो ने बीच सड़क एक मैजिक वाहन को आग लगाकर फूंक डाला | जमकर तोड़फोड़ की गयी, हाइवे में जाम लगा दिया गया और पुलिस मुर्दाबाद का जमकर नारा लगाया गया घण्टो लगे इस जाम से जहाँ आवागमन बाधित रहा वहीं इस घटना ने कानून व्यवस्था की किरकिरी कर दी।कहीं न कहीं इस पूरी घटना का जिम्मेदार अमलाई थाना को बताया जा रहा था जिसकी बानगी थाना मुर्दाबाद के नारे लगाने के बाद देखने को मिली।
*लचर कानून व्यवस्था है इसका जिम्मेदार*
हम किसी पर आक्षेप नही लगा रहे हैं पर थान क्षेत्र अन्तर्गत नशीले पदार्थों की बिक्री,मादक पेय पदार्थों का बेखौफ चलन चोरी,राहजनी,लूट या कई बाद हत्या जैसे अपराध को जन्म देते हैं।
परिजनों व आक्रोशित लोगो ने युवक की संदिग्ध परिस्थिति में हुई अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत ईटा भट्ठा निवासी युवक राकेश पनिका 22 वर्ष मौत को ह्त्या बताते हुए इसके लिए अमलाई थाना पुलिस को पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराया | साथ ही इस घटना का मुख्य सूत्रधार अमलाई थाना क्षेत्र का के ओपीएम में सक्रिय कबाड़ी शिव कुमार साहू को बताया |
*जिन्होंने की शिकायत,उन्ही को दे दिया जिम्मेदारी*
परिजनों व स्थानीय लोगो का आरोप है कि वह पिछले तीन दिन से लापता युवक का पता लगाने के लिए थाने के चक्कर लगा रहे थे, ह्त्या की आशंका जताते हुए संदेहियो का नाम भी बता रहे थे लेकिन पुलिस के इस पर बहाने बनाती रही और कहती रही कि ग्रुप बनाकर खुद पता लगाओ और पता लगे तो हमे भी बताओ। हद है ऐसी बातें सुनकर स्तब्ध होना तो लाजमी है।
जिसके बाद आज लापता युवक का दोपहर में शव मिला कहीं न कहीं इस बड़ी घटना के पीछे स्थानीय थाना की लचर व्यवस्था है।
*कबाड़ियों ने किया गुमराह*
स्थानीय लोगो के अनुसार तीन दिन पहले घर से निकले मृतक
राकेश को आखिरी बार क्षेत्र के एक कबाड़ी व उसके अन्य
साथियों के साथ देखा गया था। परिजनों का आरोप था कि
उक्त कबाड़ी व उसके साथी तथा परिजन युवक की हत्या में
शामिल हैं | जिसके बाद परिजन कबाड़ की दुकान पहुंचे और
उसमें आग लगा दी। जानकारी लगते ही स्थानीय लोग भी
इकट्ठा हो गए और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल खड़े करते
हुए शहडोल अनूपपुर मार्ग पर जाम लगा दिया, तभी अनूपपुर से अमलाई की ओर आ रहा एक छोटा हाथी वाहन को रोक कर
तोड़फोड़ करते हुए उस पर आग लगाकर वाहन को लोगो ने
पलटा दिया है। जिसके बाद घंटो बीच सड़क हंगामा होता रहा।
*प्रशासनिक अमला मौजूद*
इस पूरी घटना को प्रशासनिक अमला सम्हालने के लिए मौजूद था साँथ ही किसी प्रकार की कोई बड़ी घटना न हो उसके लिए मुस्तैद थे।आपको बता दूं कि जिले के एएसपी,सभी थाने आसपास के कस्बों के टीआई,एसडीएम, तहसीलदार, व अन्य सभी बल मौजूद थे।
*स्कूल के कमरे में भरा था कबाड़*
लोगो ने बताया कि कबाड़ी शिव ने क्षेत्र में आतंक मचा रखा है , लेकिन सब कुछ जानते हुए भी अमलाई थाना की पुलिस उसे संरक्षण दिए हुए थी | लोगो ने बाताया कि पास स्थित शासकीय स्कूल के कमरे में उक्त कबाड़ी का कबाड़ रखा हुआ है | जिसमे अधिकाँश चोरी का अथवा अवैध सामान है |
आक्रोशित लोगो ने बताया कि मृतक राकेश से पहले भी क्षेत्र से चार अन्य युवक गायब हो चुके हैं, इनमे अजय बैगा , विक्की समेत दो अन्य युवक शामिल हैं | उक्त मामले में भी पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही पूर्व में नहीं की थी, आरोप है कि कुछ मामले को तो पुलिस ने आत्म हत्या बताकर उसे ख़त्म कर दिया | जिसके परिणाम स्वरुप अपराधियों के हौसले बुलंद होते गए और अब एक और युवक की हत्या कर दी गयी | इतने संगीन आरोपों के बाद अब आगे पुलिस क्या कदम उठाएगी यह तो बाद मेपता चलेगा |
*अवैध कामो को थानों का प्रश्रय*
कोयलांचल में एक लम्बे समय से शराब, नशीली सामग्री के साथ कबाड़ माफिया सक्रीय है लेकिन इसे ख़त्म करना मानो पुलिस के लिए आसमान से तारे तोड़ने जैसा मुश्किल है | अमलाई के साथ साथ बुढार थाना क्षेत्र में बीच शहर कबाड़ी का ठीहा मौजूद है, जहाँ शहडोल ही नहीं बल्कि पडोसी जिला अनुपपुर से भारी मात्रा में कालरी से चुराया गया कालरी का लोहा व बेश कीमती मशीनों के कलपुर्जे बेचे जा रहें हैं |
*सस्पेंड हुए प्रचार्य और बीएसी, सियासी को नोटिस*
खबर लिखे जाने तक जानकरी प्राप्त हुई कि जिस विद्यालय में कबाड़ और अन्य कलपुर्जे रखे थे वहाँ के प्रधानाध्यापक को सस्पेंड कर बीएसी,सीएसी को नोटिस तलब कर जवाब माँगा गया है।
गौरतलब हो कि वहाँ के निवासियों ने बताया कि विद्यालय में कबाड़ रखने सहित ट्वायलेट के दरवाजे में कबाड़ के कलपुर्जे जलाए जाते थे यही नही 13-14 वर्ष की छात्राओं को किसी इमरजेंसी में घर जाना पड़ता था जबकि स्कूल के बाथरूम में अन्य क्रियाकलापों का जमावड़ा था।
